स्वामी श्री प्रणवानन्दजी महाराज के दर्शन की बात है। वे मानसरोवर में करीब बीस साल से रह रहे हैं। मैंने उनकी कुटिया में जाकर देखा, और वे मुझे पहले से जानते लगे। मैंने उन्हें सोमयाजी कहकर बुलाया और वे मेरी ओर देखने लगे। वे कुछ समय पहले लाहौर में रहते थे, जहाँ उन्होंने मेरे साथ कुछ दिन बिताए थे। उस समय वे राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय थे। जब मैंने उन्हें इसकी याद दिलाई, तो वे याद करने लगे कि वे कितने समय से राजनीति में शामिल थे। हालांकि, उन्होंने देखा कि बहुत से राजनेता अच्छे चरित्र के नहीं होते, जिससे उन्हें निराशा हुई और वे वहाँ से यहाँ आ गए। उसके बाद से वे योग का अभ्यास कर रहे हैं। मैंने उनसे पूछा कि उन्होंने योग से क्या सीखा है। उन्होंने मुझे कुछ योग क्रियाएं दिखाई, जैसे लंबी सांस लेना और अपने शरीर के विभिन्न हिस्सों को फूलाना। मैंने देखा कि वे अपने आसन से उठते हुए छत तक पहुंच गए और फिर नीचे आ गए। मैंने यह योग का चमत्कार अपनी आँखों से देखा। उन्होंने मुझे और भी कई योग तत्वों के बारे में बताया जो आम लोगों को नहीं पता होते। यह सब अनुभव भक्त श्री रामशरणदासजी महाराज ...
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